तमिलनाडु में मंत्रिमंडल विस्तार, TVK-कांग्रेस को जगह, सहयोगी दलों को झटका
नई दिल्ली: तमिलनाडु की सियासत में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस नए मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री विजय की पार्टी 'टीवीके' के 21 विधायकों और उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस के 2 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली है। हालांकि, सरकार के बहुमत के लिए बेहद जरूरी माने जाने वाले दो अन्य सहयोगी दल, आईयूएमएल (IUML) और वीसीके (VCK) फिलहाल इस शपथ ग्रहण समारोह का हिस्सा नहीं बने हैं। इन दोनों दलों के पास विधानसभा में 2-2 विधायक हैं और इनके लिए कैबिनेट में एक-एक सीट खाली रखी गई है, क्योंकि इन्होंने अभी तक मंत्रियों के नामों का फैसला नहीं किया है। इन्हें अगले चरण में शामिल किया जाएगा।
गठबंधन के साथियों को सरकार में आने का खुला न्यौता
टीवीके पार्टी का शीर्ष नेतृत्व लगातार अपने सहयोगी दलों जैसे वीसीके, सीपीआई, सीपीएम और आईयूएमएल को सरकार में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित कर रहा है। ये दल वर्तमान में सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं। राज्य के लोक निर्माण और खेल मंत्री आधव अर्जुन ने साफ किया कि सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना मुख्यमंत्री विजय का एक बड़ा सपना है। मुख्यमंत्री विजय ने बीते 10 मई को 9 मंत्रियों के साथ सरकार की कमान संभाली थी। राज्य के नियमों के मुताबिक कैबिनेट में अधिकतम 35 मंत्री हो सकते हैं और अब 23 नए मंत्रियों के जुड़ने से कुल संख्या 32 हो गई है, यानी सहयोगी दलों के लिए अभी भी 3 पद रिक्त हैं।
करीब छह दशकों के बाद सत्ता के गलियारे में कांग्रेस की वापसी
इस पूरे कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सुर्खी कांग्रेस पार्टी का सरकार में शामिल होना है। कांग्रेस के दो विधायक, राजेश कुमार और तिरु पी. विश्वनाथन ने नए मंत्रियों के रूप में शपथ ली है। तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में लगभग छह दशक (59 साल) के लंबे इंतजार के बाद ऐसा हो रहा है जब कांग्रेस राज्य की सत्ताधारी सरकार का हिस्सा बनी है। इससे पहले साल 1967 में एम. भक्तवत्सलम के नेतृत्व में राज्य में कांग्रेस की आखिरी सरकार चली थी।
साल 1967 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनावों में द्रविड़ दिग्गज सी.एन. अन्नादुरई के नेतृत्व वाली डीएमके (DMK) ने कांग्रेस को करारी शिकस्त दी थी। उस ऐतिहासिक चुनाव के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस कभी भी तमिलनाडु की किसी सरकार में शामिल नहीं हो सकी थी। अब मुख्यमंत्री विजय के मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर पार्टी ने एक बार फिर राज्य की सत्ता में अपनी मजबूत और ऐतिहासिक वापसी दर्ज कराई है।
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