पुणे सीट पर सस्पेंस बरकरार, महायुति में नहीं बन रही सहमति
पुणे: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 16 सीटों पर आगामी 18 जून को चुनाव कराने के एलान के साथ ही, पुणे स्थानीय निकाय सीट को लेकर सत्ताधारी महायुति गठबंधन के भीतर खींचतान शुरू हो गई है। साल 2022 से खाली पड़ी यह हाई-प्रोफाइल सीट पारंपरिक रूप से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के पास थी, लेकिन राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस पर अपना मजबूत दावा पेश कर दिया है। इसके चलते महायुति के दोनों प्रमुख घटकों के बीच इस सीट को अपने पाले में करने की होड़ मच गई है।
सीट पर दावेदारी को लेकर बदला समीकरण
पूर्व विधायक अनिल भोसले के कार्यकाल के बाद से रिक्त चल रही इस सीट को अपने पास बरकरार रखने के लिए सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली राकांपा पूरी शिद्दत से जुटी हुई है और उम्मीदवार के नाम को लेकर पार्टी के भीतर मंथन का दौर जारी है। हालांकि, चूंकि यह स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र की सीट है, इसलिए इसमें पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के पार्षदों के साथ-साथ जिला परिषद व पंचायत समिति के सदस्य वोट डालते हैं। हालिया स्थानीय चुनावों में भाजपा ने इस पूरे क्षेत्र में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए भारी संख्या में सीटें जीती हैं, जिसके दम पर भाजपा नेतृत्व इस सीट पर अपना स्वाभाविक अधिकार मान रहा है। इसी संख्याबल के कारण आगामी चुनाव का मुकाबला केवल महायुति बनाम महाविकास आघाड़ी (MVA) न रहकर, महायुति के अंदरूनी टकराव में बदलता दिख रहा है।
दोनों दलों से कद्दावर चेहरों के नाम रेस में आगे
टिकट की इस दौड़ में भाजपा की ओर से गणेश बीडकर का नाम सबसे ऊपर चल रहा है, जिन्हें राज्य के कद्दावर नेता देवेंद्र फडणवीस का बेहद विश्वस्त माना जाता है। उनके साथ ही पूर्व विधायक जगदीश मुलिक भी एक मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं, क्योंकि चर्चा है कि विधानसभा चुनाव के वक्त संगठन ने उन्हें विधान परिषद भेजने का भरोसा दिया था। दूसरी तरफ, एनसीपी खेमे से पूर्व विधायक सुनील टिंगरे, पूर्व मेयर योगेश बहल और पूर्व सांसद संजय काकड़े के बेटे विक्रम काकड़े के नामों की पैरवी की जा रही है। विक्रम काकड़े को युवा नेता पार्थ पवार का करीबी सहयोगी माना जाता है, जिससे दोनों दलों के बीच दावेदारी का यह मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
गठबंधन नेतृत्व के सामने समन्वय की परीक्षा
ऐतिहासिक रूप से पुणे और बारामती क्षेत्र में पवार परिवार का दबदबा जगजाहिर रहा है, परंतु हाल के वर्षों में भाजपा ने जमीनी स्तर पर अपनी पैठ काफी मजबूत की है। इसी वजह से भाजपा इस बार आंकड़ों का हवाला देकर पीछे हटने को तैयार नहीं है, जबकि दूसरी ओर राकांपा इस सीट को अपने राजनीतिक वजूद और प्रतिष्ठा का सवाल मानकर चल रही है। इस पूरे सियासी घटनाक्रम ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के रणनीतिक कौशल के सामने भी एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। अब राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि महायुति का शीर्ष नेतृत्व इस आपसी खींचतान को सुलझाने और पुणे सीट के लिए सर्वमान्य फॉर्मूला निकालने में कैसे कामयाब होता है।
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