SI भर्ती पेपर लीक केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, याचिका खारिज
जयपुर। राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में चयनित अभ्यर्थियों को देश की सर्वोच्च अदालत से भी बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) को बिना नोटिस जारी किए ही खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें धांधली के चलते पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर पुनः परीक्षा कराने का निर्देश दिया गया था।
प्रारंभिक स्तर पर ही याचिकाएं खारिज
पायल शर्मा और अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई याचिकाओं के समूह में राजस्थान हाई कोर्ट की खंडपीठ के 4 अप्रैल, 2026 के फैसले को चुनौती दी गई थी।
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दिग्गज वकीलों की दलीलें: अभ्यर्थियों की ओर से देश के प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और पी.एस. पाटवालिया ने विस्तार से दलीलें पेश कीं।
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अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने लंबी बहस के बाद नोटिस जारी करने से साफ इनकार कर दिया और याचिकाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त कर दिया। इसका अर्थ है कि अब हाई कोर्ट का भर्ती रद्द करने का आदेश पूरी तरह प्रभावी रहेगा।
भर्ती प्रणाली पर सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता और पवित्रता (शुचिता) को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की।
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प्रणालीगत खामियां: अदालत ने इस तथ्य को अत्यंत गंभीर माना कि इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के एक सदस्य तक की गिरफ्तारी हुई है।
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कड़ा संदेश: सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब संवैधानिक संस्था के सदस्य ही पेपर लीक जैसे अपराधों में संलिप्त पाए जाते हैं, तो यह पूरी प्रणाली की विफलता को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि आरोपी सदस्य की जमानत पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द की जा चुकी है।
भविष्य की राह
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब राजस्थान सरकार और RPSC के पास पूरी भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से आयोजित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इस निर्णय से उन हजारों ईमानदार अभ्यर्थियों को न्याय की उम्मीद जगी है जो पेपर लीक के कारण पिछड़ गए थे, वहीं चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर अब पूर्णविराम लग गया है।
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