चमचमाती कारें, लेकिन चालकों की जिंदगी धूल-धक्कड़ में
जयपुर। राजस्थान में एक ओर सरकार और उच्च अधिकारियों के काफिले में करोड़ों की लग्जरी गाड़ियां शामिल हो रही हैं, वहीं इन गाड़ियों को चलाने वाले सरकारी चालक बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। स्टेट मोटर गैराज और अन्य विभागों में कार्यरत ये चालक वर्षों से पदोन्नति, वेतनमान और सुरक्षा सुविधाओं के अभाव में काम कर रहे हैं। सरकार द्वारा मूवमेंट के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक की फॉर्च्यूनर और इनोवा जैसी महंगी गाड़ियां खरीदी जा रही हैं, लेकिन इन वाहनों को चलाने वाले चालकों की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। विभागों में पदोन्नति के अवसर लगभग खत्म हो चुके हैं, जिसके चलते 50 से 55 वर्ष की उम्र पार कर चुके चालक भी मजबूरी में ड्यूटी कर रहे हैं। ढलती उम्र और कमजोर होती नजर के बावजूद ये चालक लगातार हाई-प्रोफाइल जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, जो न केवल उनके लिए बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंताजनक है। 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने वाले इन कर्मचारियों को उनकी जिम्मेदारी के अनुरूप न तो उचित वेतन मिल रहा है और न ही हार्ड ड्यूटी भत्ता, मैस भत्ता या बीमा सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अखिल राजस्थान राज्य वाहन चालक एवं तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष अजयवीर सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “लाखों की लग्जरी कारों में बैठने वाली सरकार को चालकों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा है। एक तरफ महंगी गाड़ियों पर खर्च बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ चालक वर्षों से सम्मानजनक वेतन और पदोन्नति के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”उन्होंने मांग की कि चालकों के लिए प्रमोशन का स्पष्ट ढांचा तैयार किया जाए, एमटीओ और सुपरवाइजर जैसे पद सृजित किए जाएं तथा अनिवार्य बीमा योजना लागू की जाए। साथ ही 55 वर्ष की आयु के बाद चालकों के कार्य की प्रकृति बदलने की व्यवस्था भी की जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो संगठन आंदोलन करने को मजबूर होगा।
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