राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में रखे अपने विचार
नई दिल्ली। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा है कि प्रलोभन तंत्रों पर, तुष्टिकरण पर, जिसे अक्सर फ्रीबीज के रूप में जाना जाता है, सदन को विचार करने की जरुरत है क्योंकि देश तभी प्रगति करता है जब पूंजीगत व्यय उपलब्ध हो। राज्यसभा में बुधवार को उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया ऐसी हो गई है कि ये चुनावी प्रलोभन बन गए हैं। इसके बाद सत्ता में आई सरकारों को इतनी असहज स्थिति का सामना करना पड़ा कि वे अपनी सोच पर पुनर्विचार करना चाहती थीं। एक राष्ट्रीय नीति की अत्यंत जरुरत है ताकि सरकार के सभी निवेश किसी भी रूप में बड़े हित में उपयोग किए जा सकें।
इससे पहले राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने सांसद निधि को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए प्रति वर्ष किए जाने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि सांसद निधि को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाए। उनका कहना था कि यदि यह संभव नहीं है तो फिर सांसद निधि के प्रावधान को ही खत्म कर देना चाहिए। यादव का कहना था कि मौजूदा सांसद निधि नाकाफी है, जिसके कारण जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में काम नहीं करवा पाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एक संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विधायकों को कुल मिलाकर सांसद से कहीं ज्यादा निधि मिलती है।
सभापति ने फ्रीबीज के मुद्दे पर सदन को विचार करने की बात कही। सभापति ने कहा कि हमारे संविधान में विधायिका, सांसदों, विधायकों के लिए प्रावधान किया गया था, लेकिन एक समान तंत्र नहीं था। इसलिए, आप देखेंगे कि कई राज्यों में विधानसभाएं सदस्यों को सांसदों की तुलना में अधिक भत्ते और वेतन देती हैं, और यहां तक कि पूर्व विधायकों की पेंशन में भी एक से 10 तक का अंतर है। यदि एक राज्य में किसी को एक रुपया मिलता है, तो दूसरे राज्य में पेंशन 10 गुना हो सकती है। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें कानून के जरिए हल किया जा सकता है और इससे राजनेताओं, सरकार, कार्यपालिका को लाभ होगा और यह उच्च गुणवत्ता वाले निवेश को भी सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने कहा कि यदि कृषि क्षेत्र जैसी जरुरतों के लिए सब्सिडी की जरूरत है, तो इसे सीधे प्रदान की जाना चाहिए और यही विकसित देशों में प्रचलित है। मैंने अमेरिकी प्रणाली की जांच की। अमेरिका में हमारे देश की तुलना में 20 फीसदी कृषि परिवार हैं, लेकिन वहां कृषि परिवार की औसत आय अमेरिका के सामान्य परिवार की आय से ज्यादा है। इसका कारण यह है कि वहां किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी सीधी, पारदर्शी और बिना किसी बिचौलिए के दी जाती है।
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