फर्जी कॉल सेंटर पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 22 आरोपी दबोचे गए
जयपुर। जयपुर पुलिस आयुक्तालय की साइबर स्पेशल टास्क टीम ने राजधानी में बड़े स्तर पर पैर पसार चुके एक फर्जी वीजा कॉल सेंटर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस की अलग-अलग टीमों ने शहर के तीन चिन्हित ठिकानों पर एक साथ सुनियोजित छापेमारी करते हुए कुल 22 शातिर आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। पकड़े गए आरोपियों में 20 महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं, जो फोन के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। पुलिस ने इनके पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, डायरियां और दस्तावेज भी बरामद किए हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में बड़ी घेराबंदी
इस पूरे ऑपरेशन को पुलिस उच्चाधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन और सटीक रणनीति के तहत अंजाम दिया गया। पुलिस को काफी समय से खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि शहर के महेश नगर और जालूपुरा थाना क्षेत्रों में कुछ संदिग्ध गिरोह सक्रिय हैं, जो फर्जी कॉल सेंटर और फर्जी वीजा आवेदन केंद्र की आड़ में भोले-भाले लोगों को निशाना बना रहे हैं। ये जालसाज विदेशों में नौकरी लगवाने और वर्क वीजा दिलाने का प्रलोभन देकर देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों से ऑनलाइन माध्यम से मोटी रकम ऐंठ रहे थे, जिसकी पुष्टि होने के बाद पुलिस ने दबिश दी।
गणपति प्लाजा और सांगानेर रोड पर पहली दो कार्रवाइयां
पुलिस की टास्क टीम ने पहली बड़ी कार्रवाई जालूपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत एमआई रोड पर स्थित गणपति प्लाजा के एक दफ्तर में की, जहां से पांच महिला टेलीकॉलर को हिरासत में लिया गया। यह गिरोह ऑनलाइन डेटा के जरिए लोगों से संपर्क साधकर प्रोसेसिंग फीस और फाइल चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठता था। इसके ठीक बाद पुलिस ने दूसरी छापेमारी महेश नगर थाना क्षेत्र के न्यू सांगानेर रोड पर स्थित नवजीत बिल्डिंग में संचालित हो रहे एक अन्य फर्जी कॉल सेंटर पर की, जहां से भी गिरोह से जुड़ी पांच अन्य महिलाओं को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कई मोबाइल और रजिस्टर जब्त किए गए।
मॉल के दफ्तर से नेटवर्क के अन्य सदस्य गिरफ्तार
इसी सिलसिले में पुलिस द्वारा तीसरी और सबसे बड़ी कार्रवाई महेश नगर क्षेत्र के ही स्वेज फार्म स्थित ट्रिनिटी मॉल में चल रहे एक बड़े कार्यालय पर की गई। इस ठिकाने से पुलिस ने सबसे ज्यादा 12 आरोपियों को दबोचा, जिनमें 10 महिलाएं और दो पुरुष शामिल हैं। मॉल के भीतर से संचालित हो रहा यह गिरोह भी उसी तर्ज पर लोगों को विदेश भेजने का झांसा देकर उनसे भारी-भरकम ऑनलाइन भुगतान करवा रहा था। इस ठिकाने से पुलिस को एक चालू लैपटॉप, दर्जनों मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण डेटा बरामद हुआ है जो ठगी के नेटवर्क को साबित करता है।
अंतरराज्यीय नेटवर्क और मास्टरमाइंड की तलाश तेज
पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की टीमें अब पकड़े गए आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही हैं ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि इस साइबर ठगी के तार किन-किन राज्यों से जुड़े हैं और अब तक देश भर में कितने लाख या करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा चुका है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस पूरे रैकेट के मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है और जल्द ही कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
कांग्रेस नेताओं का प्रदर्शन, राहुल गांधी के साथ सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध
जेल से बाहर आते ही बनाई गैंगस्टर स्टाइल रील, रीवा पुलिस ने दबोचकर उतारा 'बॉस' का भूत
1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश, साइबर सुरक्षा पर सरकार सख्त
दो महीने पहले हुई थी शादी, मायके में नवविवाहिता ने दी जान
सीएम यादव का विपक्ष को जवाब, बोले- 'सबके लिए समान व्यवस्था होगी'
पटरी पर उतरने से पहले ही मेट्रो पर करोड़ों की मार, 8 करोड़ के सर्विस चार्ज को लेकर बढ़ा विवाद
घायल छात्रों से मिलकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार को घेरा
बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहा पाकिस्तान, कनाडा से मांगा सहयोग
महिला की हत्या कर छिपाना चाहते थे सच, दुर्ग पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार
UCC बिल पास, उत्तराखंड-गुजरात-असम के बाद चौथा राज्य बना एमपी