ट्रांसफर आदेश में गड़बड़ी: राजस्थान में एक अधिकारी का दो जिलों में तबादला
जयपुर: राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक फेरबदल के तहत हाल ही में जारी की गई स्थानांतरण सूची में एक बेहद अजीबोगरीब और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकार के दो अलग-अलग विभागों ने एक ही सरकारी अधिकारी का दो अलग-अलग स्थानों पर तबादला कर दिया। इस विरोधाभासी फैसले के सामने आने के बाद से न केवल प्रशासनिक हल्कों में हड़कंप मच गया है, बल्कि सरकारी विभागों के आपसी समन्वय और स्थानांतरण नीति की पूरी प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
कृषि विभाग ने अधिकारी को भेजा प्रतापगढ़
यह पूरा अनोखा मामला पंचायत समिति जयसमंद में तैनात सहायक अभियंता बुद्धिप्रकाश खोईवाल से जुड़ा हुआ है। सबसे पहले कृषि (ग्रुप-1) विभाग द्वारा एक आधिकारिक आदेश जारी किया गया, जिसमें राजस्थान कृषि (अभियांत्रिकी) सेवा के अधिकारी बुद्धिप्रकाश खोईवाल का स्थानांतरण सहायक अभियंता (मनरेगा), पंचायत समिति जयसमंद (जिला सलूम्बर) से बदलकर सहायक अभियंता, जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण, पीपलखूंट (जिला प्रतापगढ़) के पद पर कर दिया गया था।
पंचायतीराज विभाग के दूसरे आदेश ने उदयपुर में दी तैनाती
कृषि विभाग के आदेश के तत्काल बाद, प्रशासनिक घालमेल का दूसरा हिस्सा तब सामने आया जब ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से एक और स्थानांतरण सूची जारी की गई। इस दूसरी सूची में भी बुद्धिप्रकाश खोईवाल का ही नाम शामिल था, लेकिन इस बार उनका तबादला पंचायत समिति जयसमंद से बदलकर पंचायत समिति झाड़ोल (जिला उदयपुर) कर दिया गया। एक ही समय पर दो अलग-अलग जिलों के लिए जारी इन आदेशों ने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी।
अधिकारी ने झाड़ोल में संभाला पदभार और कैडर पर उठे सवाल
इसी बीच, जयसमंद के खंड विकास अधिकारी ने पंचायतीराज विभाग के आदेश को आधार मानते हुए सहायक अभियंता को वहां से कार्यमुक्त कर दिया, जिसके बाद अधिकारी ने झाड़ोल पहुंचकर अपना कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। यहीं से तकनीकी और कानूनी पेंच फंस गया है, क्योंकि विभागीय नियमों के अनुसार बुद्धिप्रकाश खोईवाल का मूल कैडर राजस्थान कृषि (अभियांत्रिकी) सेवा का है। नियमानुसार किसी भी अधिकारी को अपने मूल विभाग के आदेश का पालन करना अनिवार्य होता है, जिसकी यहां अनदेखी होती प्रतीत हो रही है।
दोनों विभागों में समन्वय की कमी और सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार
इस दोहरे तबादले ने सचिवालय से लेकर जिला स्तर के कार्यालयों तक एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किस विभाग का आदेश अंतिम रूप से प्रभावी माना जाएगा। क्या पंचायतीराज विभाग के आदेश के आगे मूल कृषि विभाग के आदेश को दरकिनार कर दिया गया या फिर यह दोनों विभागों के बीच संवादहीनता का नतीजा है। फिलहाल इस प्रशासनिक चूक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब सभी की निगाहें राज्य सरकार के शुद्धिपत्र या अगले सुधारात्मक कदम पर टिकी हैं।
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