गाजा संघर्ष ने भड़काया जनाक्रोश, इजराइल की नीति पर अंतरराष्ट्रीय सवाल
गाजा में हो रहे इजराइली हमलों में बड़े पैमाने पर हो रही नागरिक क्षति के खिलाफ दुनिया भर में गुस्सा बढ़ता जा रहा है. पिछले 18 महीनों से जारी जंग के खिलाफ कई देश और मानवीय संगठन इजराइल की निंदा कर रहे थे, लेकिन अब ये निंदा जनता के विरोध प्रदर्शनों में बदल गई है और इसकी आग भारत तक आ गई है.
इस हफ्ते भारत के पड़ोसी देशों में इजराइल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और इन प्रदर्शनों में ऐसे नारे और झंडे लहराए गए हैं, जिनका मतलब पूरी दुनिया में इस्लामी राज और मुसलमानों के दुश्मनों के खात्मा है. इस हफ्ते बांग्लादेश, पाकिस्तान और मालदीव में इजराइल के खिलाफ प्रदर्शनों हुए हैं, ये प्रदर्शन इकनी जोर दार थे कि सभी विदेशी मीडिया में इसकी चर्चा हो रही है.
मालदीव और बांग्लादेश ने लिया एक्शन
देश में बड़े प्रदर्शनों के बाद मालदीव और बांग्लादेश सरकार ने इजराइल के खिलाफ फैसले लिए हैं. राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू ने मंगलवार को उस कानून को मंजूरी दी, जो इजराइली नागरिकों के देश में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएगा.
उनके ऑफिस ने एक बयान में कहा, “यह मंज़ूरी सरकार के इस दृढ़ रुख को दर्शाती है कि इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ किए जा रहे अत्याचारों और नरसंहार के जारी कृत्यों के जवाब में सरकार ने यह कदम उठाया है.”
वहीं बांग्लादेश सरकार ने भी प्रदर्शनों के बाद अपने पासपोर्ट पर उस वाक्य को फिर लिखने के आदेश दिए, जिसमें पासपोर्ट पर ये लिखा होगा, “ये इजराइल के अलावा सभी देशों में मान्य है.”
पाकिस्तान से हुई सेना भेजने की मांग
वहीं पाकिस्तान में हुए प्रदर्शनों में लोगों ने पाक सेना से अपील की कि वो गाजा के लिए निकले और फिलिस्तीन का साथ दे. वहीं इस दौरान कई जगह उन कंपनियों को स्टोरों में भी तोड़-फोड़ की गई, जो इजराइल का समर्थन करती है.
भारत को इन प्रदर्शनों से क्या खतरा?
पड़ोसी देशों में हुए इन प्रदर्शनों कई कट्टरवादी संगठनों ने खिलाफत की मांग का मुद्दा उठाया, साथ ही कई जगह भारत के खिलाफ भी नारेबाजी की गई है. वहीं इन प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि इनके देश की सेना इजराइल के खिलाफ एक्शन ले, अगर ऐसा होता है तो भारत के चारो ओर अशांति की स्थिति पैदा हो सकती है और इसका फायदा भारत के कट्टरपंथी लोग उठा सकते हैं.
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