COEMPT को पेपर सेटिंग का ठेका, राहुल गांधी ने पूछे चार अहम सवाल
नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर तीखे हमले किए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर आरोप लगाया कि सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) का कॉन्ट्रैक्ट 'COEMPT' नाम की कंपनी को दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह कंपनी अपने पुराने नाम 'ग्लोबरेना' के दौरान काफी विवादों में रह चुकी है। कांग्रेस नेता का कहना है कि सरकार ने या तो कंपनी का बैकग्राउंड चेक करने के बाद भी उसे यह काम सौंप दिया, या फिर बिना किसी जांच-परख के ही कॉन्ट्रैक्ट दे दिया। दोनों ही सूरतों में सरकार की बड़ी लापरवाही सामने आती है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें सच में छात्रों के भविष्य की चिंता होती, तो शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही हटा दिया गया होता।
राहुल गांधी द्वारा उठाए गए चार बड़े सवाल
इस पूरे मामले को लेकर राहुल गांधी ने सीधे सरकार से चार मुख्य सवाल पूछे हैं। उन्होंने सवाल किया है कि आखिरकार विवादित बैकग्राउंड वाली इस कंपनी को सीबीएसई का इतना महत्वपूर्ण कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया गया और यह फैसला किसके आदेश पर लिया गया? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या इस कंपनी को काम सौंपने से पहले इसके इतिहास की कोई जांच की गई थी या नहीं? इसके अलावा, राहुल गांधी ने 'COEMPT' कंपनी के मैनेजमेंट और मोदी सरकार के बीच के आपसी रिश्तों को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं, जिससे इस मामले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक और आरोपों पर सफाई
सीबीएसई कक्षा 12वीं की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर मचे इस बवाल के बीच, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद सीबीएसई मुख्यालय जाकर अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) और वेरिफिकेशन के दौरान छात्रों को आ रही तकनीकी दिक्कतों और पेमेंट से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। वहीं, राहुल गांधी के गंभीर आरोपों पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ किया कि सीबीएसई इस पूरे मामले पर पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है। उन्होंने कहा कि कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देने की पूरी प्रक्रिया भारत सरकार की तय खरीद नीति (प्रोक्योरमेंट पॉलिसी) के नियमों के अनुसार ही पूरी की गई है।
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