BRICS में सबसे रईस कौन? जानें नंबर-1 का ताज किसके सिर!
नई दिल्ली: भारत की राजधानी में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों का महत्वपूर्ण दो-दिवसीय शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है, जिसकी कमान भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संभाल रहे हैं।
वैश्विक मंच पर भारत की अध्यक्षता और विजन
इस वर्ष भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित है। बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ गहन चर्चा की जा रही है ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत और टिकाऊ ढांचा तैयार किया जा सके। डॉ. जयशंकर की अध्यक्षता में हो रहा यह आयोजन न केवल राजनयिक संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है, बल्कि विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक पटल पर मजबूती से रखने का कार्य भी कर रहा है।
आर्थिक शक्ति और ब्रिक्स का बढ़ता दायरा
मौजूदा समय में ब्रिक्स समूह अपनी सदस्य संख्या विस्तार के बाद विश्व की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभरा है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, ईरान और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली देश भी शामिल हैं। क्रय शक्ति समता के आधार पर देखा जाए तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में इस समूह की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जो विश्व मंच पर इसके बढ़ते प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। हालिया आंकड़ों के अनुसार इस समूह की कुल जीडीपी 31.7 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच गई है, जो वैश्विक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा है।
प्रति व्यक्ति आय के मामले में सदस्य देशों की स्थिति
समूह के भीतर आर्थिक संपन्नता का विश्लेषण करने पर यह तथ्य सामने आता है कि संयुक्त अरब अमीरात प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे शीर्ष पायदान पर काबिज है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार यूएई की प्रति व्यक्ति आय 50,000 डॉलर के पार है, जबकि सऊदी अरब और रूस भी इस सूची में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं। हालांकि भारत और इथियोपिया जैसे देश इस सूची में निचले क्रम पर हैं, लेकिन उनकी बढ़ती आर्थिक विकास दर और विशाल बाजार उन्हें इस समूह का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं।
भविष्य की रणनीतियां और नए साझेदार देशों का आगमन
ब्रिक्स समूह अपनी पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है, जिसके तहत बेलारूस, मलेशिया और वियतनाम जैसे 10 नए पार्टनर देशों को भी इस गठबंधन से जोड़ा गया है। इन नए सहयोगियों के आने से न केवल इस ब्लॉक की भौगोलिक विविधता बढ़ी है, बल्कि व्यापार और तकनीकी साझाकरण के नए रास्ते भी खुले हैं। आगामी सत्रों में इन सहयोगी देशों के साथ मिलकर वैश्विक व्यापार नीतियों और साझा सुरक्षा हितों पर ठोस रणनीतियां बनाने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की नींव और मजबूत होगी।
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