जालौर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को जिले के पंसेरी गांव में आयोजित ग्राम विकास चौपाल के दौरान किसानों, पशुपालकों और स्थानीय ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य सरकार की भविष्य की योजनाओं और ग्रामीण विकास के अपने दृष्टिकोण को जनता के सामने रखा। उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से किसानों से पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीक और जैविक खेती की दिशा में कदम बढ़ाने का विशेष आग्रह किया ताकि प्रदेश का कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर बन सके।

राजस्थान को आदर्श राज्य बनाने का संकल्प और ब्लूप्रिंट

मुख्यमंत्री ने चौपाल को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी सरकार जनभावनाओं के अनुरूप प्रदेश के चहुंमुखी विकास का एक विस्तृत रोडमैप तैयार कर रही है जिसका अंतिम लक्ष्य राजस्थान को देश के एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-वार्ड अभियान के माध्यम से प्रत्येक पंचायत के सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है। इस पहल के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि विकास की किरण प्रदेश के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव आए।

जल प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य

प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार बिजली और पानी की निरंतर उपलब्धता को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता मानकर चल रही है। मुख्यमंत्री ने सिंचाई और पेयजल की समस्याओं के समाधान के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौते और इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सोम-कमला-अंबा परियोजना के माध्यम से जवाई बांध में जल स्तर सुधारा जाएगा जिससे जालौर, पाली और सिरोही जिलों की प्यास बुझेगी। इसके अतिरिक्त सरकार ने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2027 तक समूचे राजस्थान के किसानों को खेती के लिए दिन के समय निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

पशुपालकों का आर्थिक सशक्तिकरण और सरकारी प्रोत्साहन

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र के लिए भी मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाओं और मौजूदा लाभों का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि गोपाल क्रेडिट कार्ड और मंगला पशु बीमा जैसी योजनाओं के जरिए पशुपालकों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है। दुग्ध उत्पादकों के प्रोत्साहन के लिए प्रति लीटर पांच रुपये का अनुदान दिया जा रहा है और बीमार पशुओं के त्वरित उपचार के लिए मोबाइल यूनिट वैन की सेवाओं का विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य की योजनाएं मिलकर पशुपालकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का कार्य कर रही हैं।

आधुनिक कृषि नवाचार और युवाओं की भागीदारी

खेती को अधिक लाभप्रद बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को अपनाने की सलाह दी ताकि पानी की हर बूंद का सदुपयोग हो सके। उन्होंने रासायनिक खादों के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए जैविक खेती को अपनाने की अपील की और युवाओं को कृषि क्षेत्र में स्वरोजगार तलाशने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसानों और पशुपालकों के अनुभवों को सुना और उनके द्वारा किए जा रहे नवाचारों की सराहना की। इस दौरान सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।