इंदौर में करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं मिला प्याऊ, हाईकोर्ट ने जताई सख्ती
इंदौर | स्मार्ट सिटी योजना के तहत जनता की सुविधा के लिए खर्च किए गए करोड़ों रुपये अब विवादों के घेरे में हैं। शहर के प्रमुख चौराहों और इलाकों में राहगीरों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की लागत से आरओ (RO) मशीनें स्थापित की गई थीं। योजना के अनुसार इन मशीनों को 10 वर्षों तक सेवा देनी थी, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। भीषण गर्मी के इस दौर में आधुनिक प्याऊ गायब हैं और लोग बाजार से पानी की बोतलें खरीदने को मजबूर हैं।
हाई कोर्ट सख्त: नगर निगम और प्रशासन से मांगा जवाब
मशीनों के रहस्यमयी ढंग से गायब होने का मामला अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुँच गया है। याचिकाकर्ता महेश गर्ग द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने इंदौर नगर निगम, मुख्य सचिव (नगरीय प्रशासन विभाग), और नर्मदा जल वितरण विभाग के अधिकारियों को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आखिर जनता के पैसे से खरीदी गई ये मशीनें कहाँ चली गईं?
रखरखाव का दावा फेल: 15 जून को होगी अगली सुनवाई
प्रोजेक्ट की शर्तों के मुताबिक, इन मशीनों का हर साल रखरखाव (Maintenance) किया जाना अनिवार्य था, ताकि वे लंबे समय तक कार्यशील रहें। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि जिम्मेदार अधिकारियों को भी मशीनों के ठिकाने के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है। भ्रष्टाचार और लापरवाही के इस गंभीर मुद्दे पर हाई कोर्ट अब 15 जून को अगली सुनवाई करेगा। तब तक प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि साढ़े तीन करोड़ का बजट खर्च होने के बावजूद जनता को बुनियादी प्याऊ की सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही है।
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