28 लाख की ठगी का पर्दाफाश: गैस डीलरों ने संकट का फायदा उठाया, जनता हुई नुकसान में
भोपाल : LPG- अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से हाल के दिनों में देश भर में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत हुई। हालात के मारे लोगों के घर में जब गैस की कमी से चूल्हा बुझने की नौबत आई तो वे मजबूरी में सिलेंडर लेकर गैस एजेंसी के बाहर कतार में लगने लगे। आपदा का यह मौका एजेंसियों के लिए लाभदायक साबित हुआ। दरअसल सिलेंडर के लिए गैस एजेंसियों के कार्यालयों और गोदामों पर उपभोक्ताओं की लंबी कतार से एजेंसियों ने जमकर फायदा कमाया। एजेंसियों ने प्रति उपभोक्ता 35 रुपए की कमाई की। इस प्रकार करीब 80 हजार उपभोक्ताओं के नाम पर एजेसियों ने 28 लाख रुपए कमा लिए।कलेक्टर से लेकर नापतौल विभाग तक इस मामले की शिकायत की गई है। उपभोक्ता बाकायदा लिखित आवेदन व संबंधित अधिकारियों को कॉल कर 35 रुपए वापस कराने की मांग कर रहे हैं।
जनता नगर करोंद निवासी राजेश कुमार ने कलेक्टर से लिखित शिकायत की है कि उनकी एजेंसी हैप्पी गैस एजेंसी ने उन्हें सिलेंडर की होम डिलीवरी देने से मना कर दिया था। वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचे। ऑयल कंपनियों के नियम के अनुसार, सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए एजेंसियों को 35 रुपए मिलते हैं। जब उन्होंने एजेंसी जाकर इस होम डिलीवरी वाले 35 रुपए की वापसी चाही तो इंकार कर दिया गया। शिकायत में उन्होंने संचालक का नाम भी लिखा। उन्होंने एजेंसी पर कार्रवाई करते हुए होम डिलीवरी शुरू कराने व एजेंसी पर जाकर सिलेंडर लेने पर होम डिलीवरी शुल्क दिलाने की मांग की।बता दें, सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए कंपनियां एजेसियों को प्रति सिलेंडर 35 रुपए देती है। अगर उपभोक्ता सीधे एजेंसी से सिलेंडर ले रहे हैं, तो उन्हें यह राशि लौटानी चाहिए।
रोज 3000 उपभोक्ता पहुंच रहे एजेंसी, नापतौल विभाग करेगा कार्रवाई
अब भी रोजाना करीब 3000 उपभोक्ता एजेंसियों पर पहुंचकर डिलीवरी ले रहे हैं। रोजाना 12 हजार से अधिक बुकिंग हो रही, जबकि छह से सात हजार को ही डिलीवरी दे पा रहे हैं। जिले में करीब 50 एजेंसियां है। शनिवार को ही प्रशासन ने एजेंसियों के गोदामों की जांच की। हालांकि अभी कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली है। उप नियंत्रक नापतौल नसीमुद्दीन खान का कहना है कि तौल में कमी और होम डिलीवरी का शुल्क भी उपभोक्ताओं से लेने के मामले में कार्रवाई की जा रही है। खाद्य टीम के साथ प्रकरण बना रहे हैं। ऐसी एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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