सामरिक शक्ति बढ़ी: भारतीय नौसेना को मिले 3 नए घातक जहाज
नई दिल्ली। हिंद महासागर क्षेत्र में बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों और चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच भारतीय नौसेना की मारक क्षमता को एक बड़ी मजबूती मिली है। सोमवार को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय नौसेना को एक ही दिन में तीन नए अत्याधुनिक जहाज सौंपे। इन जहाजों में दूनागिरी नामक एक स्टेल्थ फ्रिगेट, अग्रेय नामक एंटी-सबमरीन युद्धपोत और संशोधक नामक एक विशाल सर्वेक्षण पोत शामिल है। ये तीनों जहाज आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सिद्ध करते हुए उच्च स्तरीय स्वदेशी तकनीक से निर्मित हैं।
इस खेप में सबसे प्रमुख दूनागिरी है, जो प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित नीलगिरि श्रेणी का पांचवां गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। लगभग 6,670 टन वजनी और 149 मीटर लंबा यह युद्धपोत ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलों और उन्नत लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल प्रणालियों से लैस है। इसे हवा, सतह और गहरे पानी के नीचे बहु-आयामी ऑपरेशनों को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। वारशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किए गए इस जहाज के निर्माण में 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का योगदान रहा है। नौसेना की पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को विस्तार देने के लिए अग्रेय को शामिल किया गया है। यह अरनाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट्स में से चौथा जहाज है। 77 मीटर लंबा यह वॉटरजेट-संचालित युद्धपोत अत्याधुनिक लाइटवेट टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार से लैस है, जो तटीय निगरानी और माइन-वॉरफेयर में निर्णायक भूमिका निभाएगा। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी पुर्जों का इस्तेमाल किया गया है।वहीं, तीसरा जहाज संशोधक एक विशाल सर्वेक्षण पोत (लार्ज सर्वे वेसल) है, जिसका वजन 3400 टन है। इसका मुख्य कार्य समुद्री रास्तों का सटीक निर्धारण करना और तटीय व गहरे पानी का हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है। यह पोत ऑटोनॉमस अंडरवॉटर व्हीकल और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसे आधुनिक उपकरणों से लैस है, जो रक्षा और नागरिक दोनों उद्देश्यों के लिए डेटा एकत्र करेगा। जीआरएसई वर्तमान में नौसेना के लिए कई अन्य परियोजनाओं पर भी काम कर रहा है, जिसमें अगली पीढ़ी के पेट्रोल वेसल और कार्वेट शामिल हैं। एक साथ तीन जहाजों का नौसेना को सौंपा जाना न केवल रक्षा निर्माण की गति को दर्शाता है, बल्कि यह हिंद महासागर में भारत की नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका को भी और अधिक सशक्त बनाता है।
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