मंदिर की स्थापना चंद्रावती शासनकाल से जुड़ी ऐतिहासिक धरोहर
सिरोही। जिले में चंद्रावती गांव के पास पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता का मंदिर एक प्राचीन आस्था स्थल है। यह मंदिर आबूरोड-पालनपुर फोरलेन से लगभग 500 मीटर दूरी पर स्थित है और श्रद्धालु यहां तक पैदल या निजी वाहनों से पहुंचते हैं।
सीढ़ियों के माध्यम से दर्शन की व्यवस्था
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 200 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां लोहे के शेड लगाए गए हैं, जिससे धूप, गर्मी और बारिश से बचाव हो सके।
गर्भगृह और मंदिर परिसर की विशेषता
मंदिर के गर्भगृह में चामुंडा माता विराजमान हैं। बाहर की ओर काला भैरव और गोरा भैरव की प्रतिमाएं स्थापित हैं, जबकि माता के सामने शेर की मूर्ति लगी है। मंदिर परिसर से शहर का फोरलेन मार्ग और आसपास की पहाड़ियां स्पष्ट दिखाई देती हैं, जो इसकी सुंदरता को बढ़ाती हैं।
चंद्रावती शासनकाल से जुड़ा इतिहास
इस मंदिर का इतिहास चंद्रावती शासनकाल से जुड़ा हुआ है। 11वीं-12वीं शताब्दी में चंद्रावती परमार राजाओं की राजधानी रही थी, जहां यशोधवल और धारवर्ष जैसे शासकों का शासन था। उस समय यह नगरी शैव, वैष्णव और जैन मंदिरों तथा राजप्रासादों से समृद्ध थी।
परमार राजाओं की कुलदेवी
ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, चामुंडा माता परमार राजाओं की कुलदेवी रही हैं। वर्ष 1303 तक यह क्षेत्र परमारों के अधीन रहा, इसके बाद देवड़ा चौहानों का शासन स्थापित हुआ। समय के साथ मंदिर का कई चरणों में विकास किया गया।
मंदिर परिसर में गौशाला और धरोहरें
मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के पास एक गौशाला भी संचालित की जा रही है, जहां गायों का पालन-पोषण मंदिर प्रबंधन द्वारा किया जाता है। इसके समीप ही प्राचीन चंद्रावती नगरी से संबंधित धरोहरें भी संरक्षित की गई हैं।
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