भय और बाधाओं से मुक्ति दिलाता है नरसिंह व्रत, क्या आप भी रखें?
उज्जैन. हिंदू धर्म में नरसिंह द्वादशी का खास महत्व माना जाता है. यह व्रत भगवान नरसिंह को समर्पित है और होली से करीब तीन दिन पहले रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से अज्ञात भय दूर होता है, घर के झगड़े शांत होते हैं और शत्रुओं से राहत मिलती है. जो लोग डर, तनाव या विरोधियों से परेशान हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत फलदायक माना गया है. साल 2026 में यह व्रत कब रखा जाएगा और इससे क्या लाभ मिलते हैं, आइए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज से विस्तार से. पंचांग के अनुसार, इस साल फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि की शुरुआत 27 फरवरी को 10 बजकर 32 मिनट के लगभग पर हो रही है. वहीं इसका समापन 28 फरवरी को रात में 8 बजकर 43 मिनट के लगभग पर होगा. इसके चलते नरसिंह द्वादशी 28 फरवरी को मनाई जाएगी और व्रत भी इसी दिन रखा जाएगा.
नरसिंह द्वादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि नरसिंह द्वादशी का व्रत रखने से साधक पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा बनी रहती है. इस व्रत से पापों का क्षय होता है और मन से भय दूर होता है. माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत करने वाले भक्त की रक्षा स्वयं भगवान नरसिंह करते हैं, जैसे उन्होंने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी. उनकी पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, शत्रुओं का प्रभाव कम होता है और व्यक्ति को अंततः मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है.
नरसिंह द्वादशी की पूजा विधि
नरसिंह द्वादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और स्नान कर स्वच्छ पीले वस्त्र धारण कर लें. घर के पूजा स्थल को साफ कर लें और भगवान नरसिंह की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा शुरू करें. पूजा में भगवान को फूल, फल, मिष्ठान और पंचामृत आदि अर्पित करें. फिर पूर्व या उत्तर दिशा में अपना मुख पूजा करें और भगवान के प्रति पूरी श्रद्धा रखें. इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम, नरसिंह स्तोत्र के साथ ही भगवान विष्णु की आरती कर पूजा को पूरा करें. भगवान को अर्पित किए भोग को परिवार में बांटें.
नृसिंह द्वादशी पर करें इन मंत्रों का जाप
1. नरसिंह सुरक्षा मंत्र
ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युं मृत्युं नमाम्यहम्॥
2. नरसिंह गायत्री मंत्र
ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि।
तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।
3. नृसिंह स्तुति
नमस्ते नरसिंहाय प्रह्लादाह्लाद-दायिने।
हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये।।
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः।
बहिरनृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादि शरणं प्रपद्ये॥
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