रूस को कोई लेना देना नहीं, अमेरिका-नाटो ग्रीनलैंड मामले को आपस में सुलझा लेंगे
मास्को। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए बेताब हैं। ट्रंप बार बार कहा रहे हैं कि वह ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। हालांकि ट्रंप की इस योजना से अमेरिका के साथी भी नाराज हो गए हैं। नाटो के कई देशों ने ग्रीनलैंड पर कब्जे के खिलाफ चेतावनी दी है। नाटो देशों ने यह तक कहा है कि हमले की स्थिति में वे ग्रीनलैंड की रक्षा करेंगे और अगर अमेरिका हमला करता है तो यह नाटो के अंत जैसा होगा।
अब इन सब के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का एक दिलचस्प बयान सामने आया है। इस बयान से झलक रही है कि पुतिन को अमेरिका बनाम यूरोप की यह जुबानी जंग रास आ रही है। पुतिन ने हाल ही में रूस को ट्रंप की ग्रीनलैंड को लेकर महत्वाकांक्षाओं से दूर कर लिया है। पुतिन ने कहा है कि रूस को इस सबसे कोई लेना देना नहीं है और अमेरिका और उसके नाटो सहयोगी इस मामले को आपस में सुलझा लेंगे। एक तरफ पुतिन ने ग्रीनलैंड के लोगों के प्रति सहानुभूति जताने का दिखावा भी किया लेकिन दूसरी तरफ उनके शब्दों में आलोचना दूर दूर तक नजर नहीं आई।
यह इसीलिए भी आश्चर्यजनक है क्योंकि ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने को सही ठहराने के लिए कई बार रूसी आक्रमण की आशंका को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप का कहना है कि रूस या चीन कभी भी ग्रीनलैंड पर हमला कर देंगे। इसीलिए वे पहले ही इसे अमेरिकी संरक्षण में लाना चाहते हैं। पुतिन ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में दिए गए बयान में कहा कि ग्रीनलैंड का क्या होगा इससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है। वैसे डेनमार्क ने हमेशा ग्रीनलैंड को एक उपनिवेश के रूप में माना है और उसके प्रति काफी कठोर रहा है, लेकिन यह पूरी तरह से एक अलग मामला है और मुझे शक है कि अभी इसमें किसी की दिलचस्पी है। निश्चित रूप से यह हमसे संबंधित नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है कि वे इसे आपस में सुलझा लेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक क्रेमलिन ने ग्रीनलैंड मुद्दे पर ना तो ट्रंप की आलोचना की है और ना ही उनका समर्थन किया। ट्रंप की योजनाओं के प्रति रूस की अप्रत्यक्ष सहमति एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसे समय में जब अमेरिका का ध्यान कहीं और लगा हो, रूस के पास पश्चिमी देशों की एकता को कमजोर करने का अच्छा मौका है। यह रणनीति कुछ हद तक काम करती हुई भी दिख रही है। वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों का पूरा ध्यान ग्रीनलैंड पर होने से यूक्रेन युद्ध में अपने लक्ष्यों को हासिल करने का रूस को अहम समय मिल गया है।
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