महाभारत से जुड़ा गणेश मंदिर बना आस्था का प्रतीक, चतुर्थी पर बाणगंगा कुंड में दिखी श्रद्धा की बाढ़
शिवपुरीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी में महाभारत कालीन एक प्राचीन गणेश मंदिर है। गणेश महोत्सव में यह लोगों की बड़ी आस्था का केंद्र होता है। शिवपुरी के बाणगंगा मंदिर परिसर में महाभारत काल के दौरान पांडवों ने यहां अपना अज्ञातवास गुजारा गया था। इस दौरान यहां पर अर्जुन ने अपने बाण से 52 कुंड बनाए थे।इन 52 कुंडों में से एक कुंड पर गणेश मंदिर की स्थापना भी की गई थी। महाभारत काल से ही गणेश प्रतिमा कुंड के ऊपर स्थापित है। वर्तमान में यह प्राचीन गणेश मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। गणेश महोत्सव के दौरान इस मंदिर पर लोग दूर-दूर से भगवान गणेश की पूजा करने के लिए आ रहे हैं।
कुंड के ऊपर बना है गणेश मंदिर
बाणगंगा मंदिर क्षेत्र परिसर के आसपास 52 पवित्र कुंड है। ऐसा माना जाता है कि यहां पांडवों में से एक अर्जुन ने भीम की प्यास बुझाने के लिए अपने बाढ़ से गंगा निकाली थी। शिवपुरी के सीनियर लेखक और इतिहासकार अशोक मोहिते का कहना है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने कुछ समय शिवपुरी के घने जंगलों में गुजारा था। शिवपुरी के पास ही बैराड़ नगर है जो उस समय का विराट नगर कहलाता था। विराटनगर में भी महाभारत काल के दौरान पांडवों ने अपना काफी समय गुजारा। जंगलों में कुछ समय गुजारने के दौरान पांडवों ने बाणगंगा से सिद्धेश्वर तक कुल 52 कुंडों का निर्माण किया। उन्हीं में से एक कुंड है जिस पर भगवान गणेश विराजे हैं।
गणेश महोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब
बाणगंगा क्षेत्र परिसर में स्थित गणेश मंदिर को इच्छा पूर्ण करने वाला मंदिर भी कहते हैं। इस समय गणेश महोत्सव चल रहा है। ऐसे में दूर-दूर से लोग भगवान गणेश की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। शिवपुरी के धर्मप्रेमी मनीष शिवहरे बताते हैं कि इस समय गणेश महोत्सव के दौरान जहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। गणेश महोत्सव के पहले दिन ही यहां रामधन प्रारंभ की गई है और यहां गणेश महोत्सव में प्रतिदिन कई धार्मिक कार्यक्रम व पूजा पाठ होगी।
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