अदाकारी की मिसाल बनीं श्रीदेवी, 'चांदनी' के किरदारों में दिखा हुनर
मुंबई : 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के शिवकाशी में जन्मी श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में जो मुकाम हासिल किया, वो बहुत कम अभिनेत्रियों के हिस्से में आया। श्रीदेवी की आज 62वीं जयंती है। बचपन में ही एक्टिंग शुरू करने वाली ये अदाकारा न केवल हिंदी बल्कि तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों की भी स्टार रहीं। उनकी हर फिल्म में एक नई परछाई देखने को मिली। आइए आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर जानते हैं कुछ खास फिल्मों के जरिए उनके अभिनय का अद्भुत सफर।
चालबाज (1989)
पंकज पाराशर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘चालबाज’ में श्रीदेवी ने एक साथ अंजू और मंजू की दो भूमिकाएं निभाईं। एक भोली और सीधी-सादी बहन और दूसरी तेज-तर्रार और हाजिरजवाब। यह फिल्म दर्शकों के दिलों में इसलिए भी जगह बना गई क्योंकि श्रीदेवी ने दोनों किरदारों में बारीकी से अंतर दिखाया।
मॉम (2017)
‘मॉम’ श्रीदेवी की आखिरी फिल्म थी जो रवि उदयावर द्वारा निर्देशित थी। इस फिल्म में उन्होंने देवकी नाम की मां का किरदार निभाया, जो अपनी सौतेली बेटी को न्याय दिलाने के लिए कानून से भी भिड़ जाती है। फिल्म की शूटिंग के दौरान श्रीदेवी खुद कई भावनात्मक दृश्यों के बाद रो जाया करती थीं। यही फिल्म उनके लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी लेकर आई।
लम्हे (1991)
यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित ‘लम्हे’ में श्रीदेवी ने मां और बेटी दोनों की भूमिका निभाई। पल्लवी और पूजा के रूप में उन्होंने एक ही फिल्म में दो जेनरेशन का प्यार और भावनाओं को इतने संजीदगी से निभाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इस फिल्म को लेकर कहा जाता है कि श्रीदेवी को खुद भी स्क्रिप्ट पहली बार समझ में नहीं आई थी, लेकिन यश चोपड़ा ने उनके साथ बैठकर हर सीन को डिकोड किया।
मिस्टर इंडिया (1987)
शेखर कपूर के निर्देशन में बनी ‘मिस्टर इंडिया’ में श्रीदेवी ने सीमा का किरदार निभाया। फिल्म का ‘हवा-हवाई’ गाना आज भी क्लासिक है। शूटिंग के समय श्रीदेवी को ठंड में ब्लाउज और साड़ी में शूट करना था, लेकिन उन्होंने बिना किसी शिकायत के काम किया। उनका चार्ली चैप्लिन वाला सीक्वेंस आज भी कॉमेडी क्लास में पढ़ाया जाता है।
नगीना (1986)
हरमेश मल्होत्रा द्वारा निर्देशित ‘नगीना’ में श्रीदेवी ने इच्छाधारी नागिन रजनी की भूमिका निभाई थी। इस फिल्म का गीत ‘मैं तेरी दुश्मन’ और उस पर श्रीदेवी का नागिन डांस आज भी पॉप संस्कृति का हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि इस रोल को पहले किसी और को ऑफर किया गया था, लेकिन श्रीदेवी ने इसे अपने अंदाज से अमर कर दिया।
सदमा (1983)
बालू महेन्द्रा की इस फिल्म में श्रीदेवी ने नेहालता का किरदार निभाया था, जो हादसे के बाद बच्ची जैसी हरकतें करने लगती है। कमल हासन के साथ उनकी केमिस्ट्री बेमिसाल रही। श्रीदेवी के अभिनय ने दर्शकों को इस कदर भावुक किया कि सिनेमा हॉल में कई लोग फिल्म खत्म होने के बाद रोते हुए देखे गए।
इंग्लिश विंग्लिश (2012)
गौरी शिंदे के निर्देशन में बनी इस फिल्म से श्रीदेवी ने 15 साल बाद बॉलीवुड में वापसी की। शशि गोडबोले के रूप में उन्होंने एक घरेलू महिला के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी दिखाई। यह फिल्म दुनियाभर में सराही गई। खास बात यह थी कि इस रोल को निभाने से पहले उन्होंने खुद भी इंग्लिश की ट्रेनिंग ली थी।
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